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सोमवार, 21 नवंबर 2022

मगही जनता से संवाद पत्रावली सीरीज


 मगही पिछड़ल न हई हमनी पिछड़ल हियै अगर अइसन सोचा हिययी। जे अपन संस्कृति आउ भाषा पर गर्व न करे ओकरा रहना आउ न रहना बरावर हई। हम इतिहास में न जैबो की बिम्बिसार की कइलथिन, अशोका केगो भाई के मार के राजा बनलथिन हमे बात करबो हमनी का कर सका हियाई आउ हमनी कैसे करबइ। मगही ला अब सब के मिल के काम करे पडतो एक एक आदमी चाहे कहीं रहे दुनिया में अगर जे उ मगही हइ त मगही ला आगे आवे पडतयी। प्रस्तुत हो एगो संवाद पत्रावली सीरीज, जादे से जादे मगही तक पहुंचा हु। 
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 #Magahi_language_in_8th_schedule 

 १. नेता जी से संवाद: अपने मगह के नेता हथि, अपने जदि मगही ला पार्लियामेंट में आवाज़ न उठायीथीन त कैसे होताई? इ तोर माटी के क़र्ज़ हो जेकरा तोरे उतारे पडतो। संसद में मगही ला आवाज बुलंद कर हु। जितना हो सके जनता से मगही में संवाद करहु। मगही के हमेशा आगे रख के काम करहु। मगही हो त हमनी ही एहि विचारधारा के आगे बढ़ा हु। #Magahi #मगही #मगही_जनता_से_संवाद_सीरीज #Magahi_language_in_8th_schedule

 २. आईएएस, आईपीएस से संवाद: मगह हर साल बहुत सा आईएएस, आईपीएस दे है, लेकिन ओकरा से मगही के कुछ खाश फ़ायदा न हो रहले ह। तु बन गेलु लेकिन अपन मगही ला का कैलु? कुछ फ़ायदा होलइ ओकरा से तोर अपन माटी के? कुछ न। तोरा लोग सुन हो त तोरा सब के मगही में बोले ला आउ लिखिला प्रोत्साहित करे के चाही। कम से कम मगही ला आगे आवे के चाही।
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 ३. सरकारी कर्मचारी से संवाद: तू सरकार के चेहरा हु जनता ला,तु जनता से मगही में बात कर सकलु ह। जनता के भी प्रोत्साहित कर सक्लु हे। कोई मगही में तोरा से बात करे त ओकरा हिन् भावना से मत देख हु। उ मगही के स्मिता के सिपाही हइ, ओकरा सम्मान देहु। काम में प्राथमिकता न दे सकहू त कोई बात न पर दुत्कारहु मत। तोरो कुछ फ़र्ज़ हइ मगह के प्रति। अगर मगह में रहे के हो त मगही संवाद करे पडतो।
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 ४. युवा छात्रगण से संवाद: तु मगह के न प्रान्त औ देश के भविष्य हु, सही बात हई पर तू ही मगह आउ मगही के भी भविष्य हु इ बात याद रखी ह । तोरे पर सब दारो -म-दार हो। अपन मगही के बिसर मत। साथे चले द। भविष्य जरूर बनाव लेकिन मगही के छोड़ के न। मगही एगो तमगा हई जी। सब ब न नौकरी क र, बिज़नेस क र, मल्टीनेशनल कंपनी के सीईओ बन जा लेकिन मगही रखS साथ में। सोसल मिडिया पर मगही के प्रओग करा। अगर मेन प्रोफाइल से मगही लिखे में दिकत बुझाये त दूसर प्रोफाइल प्रयोग क र। मगही के पॉपुलर करे के जिम्मेवारी ल। 
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 ५. कवी, साहित्यकार (रचनाकार) से संवाद: बहुत कविता आउ साहित्य के रचना कइलथिन अपने, बहुत निमन। लेकिन तोरा का ल ग हो मगही में जनता न हई ? मगही जनता के तोर रचना मगही में पढ़े सुने के अधिकार न हई ? त ? मगही में कंटेंट बनाथिन ओकरा सोशल मिडिया से जनता तक ले के जाथिन फिर देखथिन। समय आगेलो हे निज भाषा मगही में अपन बात रखे के। 
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 ६. अभिवावक गण से संवाद: घर में मगही बात करहु। बच्चन के प्रोत्साहित कर हु सीखा हु। मगही पिछड़ हई हमनी के वजह से। मगही बोले में गर्व अनुभव कर हु। लदान हिंदी इंगलिश सीखे जरूरी हई लेकिन मगही भुलादे बहुत गलत। लड़कन के मगही कंटेंट टीवी पर देखाहु। मगही में कहानी सुना हु कविता आउ गीत सुना हु। शादी बिआह में होवे वाला गीत सुने ला प्रोत्साहित कर हु। मगही अपन संस्कृति हई एकरा अपन अगला पीढ़ी तक गर्व से पहुंचा हु।
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 ७. अप्रवासी मगही मानुस से संवाद: त पढ़ लेलु, कुछ बन गेलु। बहुत निमन। लेकिन याद र ख चाहे तू केतनो IIT, आईआईएम में पढ़ ल, केतनो मेटा में ओरेकल में काम कर ल जबतक मगही ला कुछ न कईलS सब बेकार हो। तू जानS हु बहुत कुछ कर सक्लु हे, त इ झींझक़ त्यागS लगजा मगही के सेवा में। शुरुआत मगही लोग के मदद से कर सकS ह। जेतना हो सके मगहियन के मदद कहु।
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शनिवार, 11 दिसंबर 2021

कौची हइ आसमानी खतरा से पृथ्वी के बचावे ला नासा के महाप्रयोग





नासा के वैज्ञानिक एगो अंतरिक्ष यान से एसन टेकनीक के परीक्षण के तैयारी कर रहलथिन हें जेकरा से भविष्य में कोई ख़तरनाक उल्का या एस्ट्रॉयड के पृथ्वी से टकराये से रोकल जा सकले ह।

नासा के इ मिशन के नाम 'डार्ट मिशन' हई जेकर आधार पर उ पृथ्वी के ओर आवे  वाला कोई भी बड़का अंतरिक्ष चट्टान के निष्क्रिय करे ला लंबा समय से चल रहेवाला  प्रस्ताव के मूल्यांकन करतयी .

इ अंतरिक्ष यान डिमोर्फ़ोस नामक एगो आकाशीय पिंड या ऑब्जेक्ट से टकरैतयी।  नासा के वैज्ञानिक इ देखेला चाह रहलथिन हें कि डिमोर्फ़ोस के गति आउ  रास्ता के केतना बदलल जा सकले ह। 

वैज्ञानिक जे काम करेला चाह रहलथिन हें ओकर अहमियत के अंदाज़ा इ बात से लगावल जा सकले हे कि अगर कुछ सौ मीटर के ब्रह्मांडीय मलबा  (कॉस्मिक डेबरी) के एक हिस्सा पृथ्वी से टकरा जा  हई , त इ एक पूरे महाद्वीप पर तबाही मचा सकले ह।

हालांकि, डिमोफ़ोर्स से पृथ्वी के कोई ख़तरा न हई।  इ भविष्य में पृथ्वी के ओर आवे वाला अइसन ख़तरा से निपटे के तरीका सीखे के पहला प्रयास हई , यानी कल को कोई ऐसन पिंड या मलबा धरती के ओर आव हई त ओकरा कैसे दूर रखल जा सकले ह। 

नासा के प्लेनेटरी डिफ़ेंस के ऑर्डिनेशन ऑफ़िस के केली फास्ट कहलथिन , "डार्ट केवल डिमोर्फोस के कक्षा के अवधि में बस छोटा सा परिवर्तन करे के  कोशिश हइ। आउ वास्तव में भविष्य में हमनी के ओर आवे वाला एस्ट्रॉयड के रोकेला बस एतने करे पड़तइ। 

एस्टेरॉयड या उल्कापिंड, सौर मंडल के बचल खंड हइ , जेकरा में से अधिकांश से पृथ्वी के कोई ख़तरा न हइ। लेकिन जब ऐसन कोई चट्टान सूर्य के चक्कर लगइते हुए पृथ्वी के ओर बढ़ हई त टक्कर के संभावना हो स क हई। 




कइसे  होतई परीक्षण


करीब 32 करोड़ अमेरिकी डॉलर के डार्ट मिशन, एस्टेरॉयड के एक जोड़ी के निशाना बनइतई  जे इ वक्त एक-दूसरा के परिक्रमा कर रहले ह। ऐसन  परिक्रमा के बाइनरी कहल जा हई।  इ दुनू में से बड़का एस्ट्रॉयड के नाम हईडिडिमोस, जे करीब 780 मीटर में फैलल हई. डिमोफ़ोर्स करीब 160 मीटर चौड़ा हई.

डिमोफ़ोर्स के आकार वाला एस्टेरॉयड के पृथ्वी से टकराये के बाद, कई परमाणु बम के ऊर्जा जेतना असर होतई। एकरा से लाखों के जान जा सक हई. लेकिन 300 मीटर और एकरा से अधिक चौड़ाई वाला एस्टेरॉयड तो पूरे के पूरे महाद्वीप तबाह कर सकले ह। आउ एक किलोमीटर के आकार वाला पिंड तो पृथ्वी के  ख़तरा में डाल सकले ह। 

डार्ट प्रक्षेपण के बाद सितंबर 2022 तक अंतरिक्ष में घूमते रहतई आउ फिर पृथ्वी से 67 लाख मील दूर जाके अपन लक्ष्य के निशाना बनइतई। 

डार्ट लगभग 15,000 मील प्रति घंटा के गति से (6.6 किमी/सेकेंड) की गति से डिमोफ़ोर्स से टकरैतयी। एकरा से डिमोफ़ोर्स के दिशा कुछ मिलिमीटर ही बदले  के आसार हई।  अगर इ हो जईतई त, ओकर कक्षा बदल जईतई। 

इ एक बहुत ही छोटा परिवर्तन लग सकले ह लेकिन एक एस्टेरॉयड के पृथ्वी से टकराये से रोके ला बस एतने करे के जरूरत हई। 

हालांकि एतना करना भी आसान न हई। 



पृथ्वी के निकट मौजूद एस्टेरॉयड


नासा के इ मिशन के प्रोग्राम साइंटिस्ट टॉम स्टेटलर कह हथीन , "बड़ एस्टेरॉयड के तुलना में, अंतरिक्ष में बहुत सा छोटा एस्टेरॉयड हई आउ ओहि से सबसे अधिक संभावित ख़तरा भी एखनिये से हई। "

साल 2005 में, अमेरिकी कांग्रेस नासा के पृथ्वी के निकट मौजूद 90% फ़ीसदी एस्टेरॉयड के ट्रेक करे के  निर्देश देलके हल जेकरा से पृथ्वी के संभावित ख़तरा हो सका हई।  नासा एकरा से में  अब तक केवल 40% कइ ही पहचान कर पैले ह। 

डार्ट पर ड्रेको नाम के एक कैमरा भी है जे अपन मिशन के फोटो लेतइ ताकि अंतरिक्ष यान के डिमोफ़ोर्स से टकराये ला सही दिशा के पता चलते रहे। 

अपन लक्ष्य के भेदे से लगभग 10 दिन पहिले डार्ट, लिसियाक्यूब नामक एगो छोटा सैटेलाइट के इस्तेमाल करतयी। इ छोटा यान टकराये के बाद के फोटो वापस भेजतयी। 




डिमोर्फोस के घूमे के रास्ता में छोटा सा परिवर्तन के भी पृथ्वी पर दूरबीनों के ज़रिए नापल जैतई। टॉम स्टेटलर क ह हथीन , "हमनी वास्तव में जानेला चाह हिययी कि का  हमनी सही में एस्टेरॉयड के कक्षा के बदल देलियई हे आउ अगर हां त हमनी इ केतना कुशलता से कैलियई हे ?"

अइसन परीक्षण ला इ एक दुरुस्त प्रयोगशाला हई।  इ प्रयोग से डिमोर्फ़ोस के अपना रास्ता लगभग 1% बदल लेना चाहि. लेकिन एकर सही-सही पता यहाँ पृथ्वी पर मौजूद दूरबी से कई हफ्ता या महीना  में चलतइ। 

इ बात पर भी अनिश्चितता हई कि डिमोफ़ोर्स डार्ट से टकराये के बाद कैसे व्यवहार करतय काहे कि हमनी एकर अंदर के संरचना के बारे में  न जनही।  यदि डिमोफ़ोर्स अंदर से ठोस हई त ज़ाहिर है कि बहुत सा मलबा निकलतयी, जेकरा से  एकरा एक अतिरिक्त धक्का लगतयी। 

(आभार बीबीसी हिंदी)

सोमवार, 15 नवंबर 2021

कर्नाटक के इ आदिवासी महिला कैसे बन गेलथिन किसान सब के रोल मॉडल?


अगर इ पढ़ल लिखल रहथिन हल त इ सोशल मीडिया पर जरूर रहथिन हल औ  इनकर  पहचान एगो  'इंफ्लुएंसर' यानी प्रभावित करेवाला एक  व्यक्ति के रहते हल। लेकिन उनका पास कुछ अइसन कुशलता हई  कि उनका कृषि और आदिवासी कल्याण के ब्रांड एंबैस्डर तो बनावल जा हीं सक्ले हे। 

तेरह साल पहिले तक प्रेमा दासप्पा (50) जंगल में  रहहलथिन आउ बहुत कम पैसा पर मज़दूरी कर हलथिन। 

अब उ दूसर आदिवासी महिला सब के सिखा रहलथिन हें कि अपना आर्थिक सशक्तीकरण कैसे करल जाये( जादे पैसा कैसे कमावल जाये )। 

मैसूर ज़िला के एचडी कोटा से बीबीसी से बतिययिते घड़ी दासप्पा बतइलथिन पहले साल उ एक एकड़ जमीन पर चिया के बीज़ रोपलथीन हल  जेकरा बेच के  उ 90 हज़ार रुपया के  कमाई कइलथिन हल।  इ बिच्चा  उ 18 हज़ार रूपइये  क्विंटल बेचलथिन  हल। इ कमाई से उ अपन बेटा के  मोटरसाइकिल ख़रीद के देलथिन हल। 

प्रेमा जेनू कुरुबा आदिवासी समुदाय के उ 60 आदिवासी परिवार में शामिल हलथिन जे साल 2007-08 में नागरहोल टाइगर रिज़र्व के जंगल से बाहर निकले  के बदले तीन एकड़ भूमि के मुआवज़ा स्वीकार करलथिन हल। 

जेकरा में  से 15 परिवार अभी भी वन विभाग ला  मज़दूरी कर हथीन जबकि पैंतालीस दूसर परिवार सब ज़मीन के  इस्तेमाल सिर्फ़ रहेला कलथिन। केवल  प्रेमा  कुछ अलग करे ला सोचलथिन। 



इ समझे ला कि इ ज़मीन के  कैसे बढियाँ से इस्तेमाल में लआवल जाये, प्रेमा कईक जगह गेलथिन आउ उ अपन पति के साथ मिलके इहाँ खेतीबाड़ी शुरू कइलथिन।  उ चावल, ज्वार, मक्का और सब्ज़ि उगैलथिन। 

उनकर  ज़िंदगी में बदलाव पिछले दशक के अंतिम साल में अइलइ। 

प्रेमा बताव हथीन, हमनी अपन ज़मीन केरल के एक व्यक्ति के  ठेका  पर देली  हल जे दरक के खेती करेला  चाह  हलइ।  हमनी ओकरा से पैसा के बदले  कुवां खोदावेला कहलियई । 

जौन इलाक़ा  में आदिवासिय सब के  ज़मीन देल गेले हल , वहां सिंचाई के कोई व्यवस्था न हलइ। 


प्रेमा कह हथीन , "सभ बारिश पर निर्भर हलइ। इ ज़मीन इतना सुखल हई कि लोग यहां खेती करे के बजाए दूसर जगह जाके मज़दूरी करना पसंद कर हथीन।  इहां खेती में लगावल लागत के भी नुकसान होवे के ख़तरा रह हई। "

लेकिन प्रेमा के अलग नज़रिआ  आउ सीखे  के  ललक उनका बहुत फ़ायदा पहुंचैलकइ । 


कर्नाटक सरकार के वन विभाग के साथ मिलके लोग के पुनर्वास के लिए काम करे  वाली संस्था द वाइल्डलाइफ़ कंज़रवेशन सोसायटी (डब्ल्यूएलएस) भी उनकर  क्षमता के पहचानालकै। 

डब्ल्यूएलएस  ला काम करेवाला गोविंदप्पा बीबीसी के बतइलथिन , "हमनी उनकर ज़मीन पर एक पॉली हाउस लगैलियै  जहां उ हर तीन महीना में कई तरह के फलि, टमाटर, रागी और केला  अगावा हथीन।  हमनी  खाली बीज दे हीयै आउ फ़सल किसान के होवा हई। "

पॉली हाउस ग्रीन हाउस जैसन ही होव हई  लेकिन इ पॉलीथीन के बनल रहा हई आउ एकरा में सूर्य के  रोशनी किनारवा से भीतरी  जा हई। 

प्रेमा के सीखे के ललक आउ  वन विभाग आउ  डब्ल्यूएलएस के तरफ़ से देवल गेल मौका के फ़ायदा उठावे  के  कोशिश अब उनका बहुत फ़ायदा पहुँचलिके ह। 

अब उ  सुपरफूड माने जायेवाला चिया बीज उगाव हथीन आउ ओकरा महंगा दाम में बेच हथीन। 

उ हंसते हुए कह हथीन , हम दूसर किसानन  के भी चिया उगावेला बीज बेच हिओ। अब हम आधा किलो बीज ढाई सौ रुपया में दे देही। 


उ ख़ुश होके कह हथीन कि अब वन विभाग उनका दूसर  जगह पर लेके  जा हाई  जहाँ  उ  किसानन के सलाह दे हथीन। 

प्रेमा हर दूसरा -तीसरा  महीना में औसतन 50-60 हज़ार रुपया कमा ले हथीन। 

प्रेमा के दो बच्चा  हई  औ दुनु  के शादी हो चुकले ह।  उ गर्व के भाव से बतावा हथीन कि उनकर  पोती एगो  अंग्रेज़ी माध्यम स्कूल में पढ़ रहले ह। 

दो दिन पहिले वन विभाग उनका से  कृषि मेला  के  उद्घाटन करेला अपील कइलकइ . इ मेला  के  उद्घाटन मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई करेवाला हलथिन लेकिन  मुख्यमंत्री उ दिन दिल्ली में हलथिन। 


(आभार इमरान क़ुरैशी, बीबीसी हिंदी )


शनिवार, 13 नवंबर 2021

आर्यन ख़ान ड्रग्स केस: आर्थर रोड जेल के सबसे ख़तरनाक जेल काहे कहल जा हई ?

शाहरुख़ ख़ान के बेटा आर्यन ख़ान जे जेल के भितर तीन हफ्ता से अधिक बंद हलइ  उ आर्थर रोड जेल एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हई। 


ड्रग्स के मामला में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) आर्यन के गिरफ़्तार कइलके हल।  ओकर बाद से उनका ओही आर्थर रोड जेल में रखल गेले हल, जहाँ कईगो  कुख्यात गुंडा , शार्पशूटर्स, मकोका में  गिरफ़्तार अपराधी इत्यादि अपन सज़ा काट रहले  ह। 

कईगो  फ़िल्मस्टार, अंडरवर्ल्ड डॉन, राजनेता, उद्योगपति, आईपीएस अधिकारी जइसन कईगो नामी लोग इ जेल के  हवा खा चुकलथिन हे। इसब हाइप्रोफ़ाइल क़ैदि सब के वजह से ही ई  जेल ख़बर में बनल रह हई। 

एकरा देश के सबसे सुरक्षित जेल में से एक मानल जा हइ।  26/11 हमला के दोषी अजमल आमिर कसाब के नाम भी इ जेल से जुड़ल हइ। 

आख़िर का हई  इ  जेल के उ  ख़ासियत जे एकरा सबसे सुरक्षित जेल सब में से एक  बनाव हइ ?


कब बनले हल आर्थर रोड जेल

1842 से 1846 तक बॉम्बे (अब मुंबई) के गवर्नर रहल  सर जॉर्ज आर्थर के नाम पर इ जेल के नाम रखल  गेले हल । एकरा ब्रिटिश शासन काल के दौरान 1925-26 में बनावाल गेले हल। 

जब एकर निर्माण होलइ हल तखनि इ दो एकड़ ज़मीन पर बनावाल गेले हल। लेकिन लगातार क़ैदि सब के बढ़ते संख्या के देखते हुए नया बैरक बनते गेलइ औ इ तरह से आज जेल परिसर छह एकड़ ज़मीन तक पसर गेले ह। ई  मुंबई के सबसे बड़ जेल हई। 

सेंट्रल जेल बनआवेला एकरा  1994 में अपग्रेड कइल गेले हल औ वर्तमान आधिकारिक नाम 'मुंबई मध्यवर्ती कारागृह' देल गेले हल। लेकिन पुलिस, अदालत और आम जनता के बीच अभी भी एकरा आर्थर रोड जेल के नाम से निमन जानल जा हई। 

आर्थर रोड जेल के इतिहास के बारे में एबीपी न्यूज़ के क्राइम रिपोर्टर जितेंद्र दीक्षित कह हथीन  , "आर्थर रोड जेल के असली नाम मुंबई सेंट्रल जेल हई।  लेकिन आर्थर रोड पर होवे के कारण एकरा आम तौर पर आर्थर रोड जेल के नाम से ही जानल जा हई। "

ई जेल शहर के पश्चिम में महालक्ष्मी और  बिच के चिंचपोकली स्टेशन से 10 मिनट की दूरी पर हई .


देश के सबसे ख़तरनाक जेल

आर्थर रोड जेल में अंडर ट्रायल क़ैदी रखल जा हाई . जितेंद्र दीक्षित कहाहाथिन , "आर्थर रोड जेल के  देश के सबसे ख़तरनाक जेल सब में से एक मानल जा हई। "

एकर कारण इ हई  कि इहाँ संगीन अपराध के कईगो अभियुक्त सब , यहां तक कि अंडरवर्ल्ड से जुड़ल अभियुक्त सब के भी रखल गेले ह। 

12 मार्च 1993 के होल मुंबई बम धमाका के अभियुक्त सब , अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम, छोटा शकील, छोटा राजन और अरुण गवली के शार्प शूटर अभी भी इ जेल में ही क़ैद हई। 



अंडा सेल




गंभीर अपराध या आतंकवाद के अभियुक्त सब के रखे ला यहां एक अत्यधिक सुरक्षित सेल हई। जहां बहुत  गंभीर किस्म के अपराध करेवालन के रखल जा हई। 

जेल के एगो अधिकारी नाम न छापे के शर्त पर बतइलथिन कि जेल में  इ एगो अंडाकार सेल हई . यही से एकरा  अंडासेल कहल जा हई। 

सेल में कुख्यात गुंडा सब , शार्प शूटर और आतंकवाद के अभियुक्त सब के राखल जा हई।  1993 बम धमाकों के अभियुक्त सब के भी एजे राखल गेले हल। 

अधिकारी सब के मुताबिक आर्थर रोड जेल में क़ैदी सब के राखेला 14 सामान्य बैरक, एक उच्च सुरक्षा सेल, आउ  छह जो अलगे अलगे बैरक हई। पिछले कुछ साल में यहां बैरक के  संख्या में वृद्धि होल ह। 

गैंग्स्टर अबू सलेम आउ दाऊद इब्राहिम के भाई इक़बाल कासकर के प्रत्यर्पण के बाद ओकरो यहां अडा सेल में राखल गेले हल। 

(आभार बीबीसी हिंदी)

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